क्या आज हैं मेरा, कल क्या है
ये कोई समझ ना पाया है
होगा जो भी अंजाम तो क्या
है कौन नहीं अंजान यहाँ
क्यों रोकता है तू अपने कदम
क्यों सोचता है क्या होगा कल
बस चलता जा तू सोच नहीं
तू अपने कर्म बना खुद ही
किस्मत अपनी चमका खुद ही
फिर देख तमाशा दुनिया का
बेगाने भी तेरे होंगे, हर स्वप्न तेरे पूरे होंगे
सब लोग तुझे जानेंगे फिर, और तुझको फिर मानेंगे फिर
पर अभिमान कभी ना करना तू
मन द्वेष कभी ना भरना तू
बस प्रेम न्यौछावर करता चल और प्रेम दिलों में भरता चल । ।
K.Gaur
ये कोई समझ ना पाया है
होगा जो भी अंजाम तो क्या
है कौन नहीं अंजान यहाँ
क्यों रोकता है तू अपने कदम
क्यों सोचता है क्या होगा कल
बस चलता जा तू सोच नहीं
तू अपने कर्म बना खुद ही
किस्मत अपनी चमका खुद ही
फिर देख तमाशा दुनिया का
बेगाने भी तेरे होंगे, हर स्वप्न तेरे पूरे होंगे
सब लोग तुझे जानेंगे फिर, और तुझको फिर मानेंगे फिर
पर अभिमान कभी ना करना तू
मन द्वेष कभी ना भरना तू
बस प्रेम न्यौछावर करता चल और प्रेम दिलों में भरता चल । ।
K.Gaur
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