Friday, January 17, 2020

बस प्रेम दिलों में भरता चल

क्या आज हैं मेरा, कल क्या है
ये  कोई समझ ना पाया है
 होगा जो भी अंजाम तो क्या
 है कौन नहीं अंजान यहाँ
क्यों रोकता है तू अपने कदम
क्यों सोचता है क्या होगा कल
बस चलता जा तू सोच नहीं
तू अपने कर्म बना खुद ही
किस्मत अपनी चमका खुद ही
फिर देख तमाशा दुनिया का
 बेगाने भी तेरे होंगे, हर स्वप्न तेरे पूरे होंगे
सब लोग तुझे जानेंगे फिर, और तुझको फिर मानेंगे फिर
पर अभिमान कभी ना करना तू
मन द्वेष कभी ना भरना तू
बस प्रेम न्यौछावर करता चल और प्रेम दिलों में भरता चल । ।
   
                                                                       K.Gaur

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