Friday, June 19, 2020

ये तकाजा उम्र का है या वक्त का



जाते हैं क्यूँ मायने ढलती उम्र के साथ
लोग मिलतें भी तो हैं जेबें देखकर ।।

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लोग आजकल वजह से मिलते हैं ,
वो अपने थे जो बेवजह मिलते  थे ।।

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बेवजह  क्यूँ रूठता है दिल मेरे ,
अब वो यार नहीं जो यूँ ही मना लेते थे //

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ये तकाजा उम्र का है या वक्त का, जिनकों समझाते रहे हम उम्र भर, वो हमें कहते हैं तुम समझोगे नहीं //

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फासले भी है जरूरी हर रिश्तें  में ,
नजदिकीयाँ ज्यादा हो शिकवे बढ़ ही जाते हैं //

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जाऊँगा मैं छोड़कर तुझे ये  तय हैं याद रखना
बस मेरी यादों को अपने साथ रखना
रोज बात हो, मुलाकात हो, जरूरी नही हम साथ हो
पर दिल के इक कोने में मेरा घर बनाये रखना
जानता हूँ  ये मेरा हक है नहीं, ये ना कर सको तो बस मेरी यादें दिल में बसाये रखना //

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ये किसने दस्तक दी है दिल पे ये कौन है
जानता हूँ मैं - 
वो मेरा अपना नहीं फिर क्यूँ अपना सा  लगने लगा
और जानता है वो  भी- कि मुझे पा ही नहीं सकता फिर क्यूँ  मुझे खोने से वो डरने लगा /‌‌‍/

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