Wednesday, February 5, 2020

जिंदगी कुछ कर दिखाना चाहता हूँ


ऐ जिंदगी कुछ कर दिखाना चाहता हूँ
खुद के लिए नहीं दूसरों के लिए जीना चाहता हूँ
दिल में तमन्नाओ का जो शहर बनाया है मैंने
मैं उसे बसाना चाहता हूँ
देकर खुशियाँ दूसरों को मैं, खुद मुस्कुराना चाहता हूँ
बनकर मैं इंसान, बस इंसानियत का फर्ज निभाना चाहता हूँ
रौब जो हैं मौत का मेरे जिस्म पर, बस उसे आंखें दिखाना चाहता हूँ
थाम ले गर हाथ मेरा वक़्त ये, हर घाव पर मरहम लगाना चाहता हूँ
नफरतों से वास्ता ना हो किसी का, प्यार की सौगात देना चाहता हूँ
हर तरफ एक खौफ सा है, स खौफ के साये मिटाना चाहता हूँ
डूबना चाहता नहीं इस दरिया में, तैरकर उस पार जाना चाहता हूँ
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                                                                K. Gaur

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